भावनाओं में बदलाव वास्तविक आनंद से दूर हैं ।
एक गांव में एक व्यापारी अपने परिवार के साथ आनंद से रहता था। एक दिन घर लौटते समय उसे रोड पर पड़ी रत्नजड़ित अंगूठी दिखी, उसने अंगूठी उठाई और मन में सोचा कि यह नकली है इसलिए रोड पर ऐसे पड़ी है। खैर वह उस अंगूठी को जेब में रखकर घर ले आया और अलमारी में रखकर भूल गया।
2 सालों बाद वह अंगूठी उसे अलमारी में रखी दिखी जब वह कुछ और ढूंढ़ रहा था तो वह अंगूठी लेकर सुनार के पास पता करने गया कि वह असली है या नकली। सुनार ने कसौटी पर जांचकर बताया कि अंगूठी असली सोने की है और उसकी कीमत रत्न के साथ लगभग 1 लाख रुपए होगी। यह सुनकर व्यापारी बहुत प्रसन्न हो गया, अभी तक जिसे नकली समझकर ऐसे ही अलमारी के कोने में रखा हुआ था उसे अच्छे से तिजोरी में रख दिया।
अब उस व्यापारी का दिमाग सिर्फ उस अंगूठी में लग गया और व्यापार व परिवार से अब तक जो वो संतुष्ट था और आनंद से रहता था अब अंगूठी के उत्साह के साथ मन से बेचैन और असंतुष्ट रहने लगा। वह शहर के बड़े सुनार के पास गया। सुनार ने जाँच करके कहा कि यह बहुत कीमती है वह व्यापारी से बोला कि अगर वह बेचना चाहता है तो सुनार 10 लाख नगद में उससे खरीदने तैयार है।
व्यापारी ने बेचने से मना कर दिया और वापस घर आ गया। अब तो उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था वह सपनों की दुनिया में जीने लगा। खुद के छोटे से व्यापार में उसका ध्यान नहीं लगता था, परिवार में भी ध्यान नहीं लगता था। जो सुख, शांति, आनंद के साथ वह रहता था वह सब खत्म हो गया था। स्वप्न दुनिया की ख़ुशी में वो रहता था।
उसके एक मित्र बहुत अच्छे जौहरी थे। एक दिन वह उसके गाँव आए और उसके घर पर ही रुके। व्यापारी ने अपने मित्र को वह अंगूठी दिखाई, वे बहुत देर तक उसे देखते रहे फिर उन्होंने कहा कि यह रत्न बहुत कीमती है कम से कम यह अंगूठी की कीमत 50 लाख रुपए है। यह सुनकर तो उस व्यापारी के पैर जमीन में नहीं टिक रहे थे, वो बहुत खुश हो गया था।
अब उसे अपना घर, दुकान, गाँव बहुत बेकार लगने लगे । अब उसे अंगूठी के अलावा बाकि सब बुरा लगने लगा, उसने अपना छोटा व्यापार भी बंद कर दिया और उसके मन में लालच बढ़ता गया कि यह अंगूठी 1 करोड़ में बेचूंगा फिर ठाठ से रहूँगा और बड़ा व्यापार करूँगा।
उसने अपनी आय का साधन बंद ही कर दिया था, परिवार के पास जो जमा पूंजी थी वह खर्च कर रहा था वो भी पहले से ज़्यादा खर्च क्योंकि अब वह मानसिक तौर पर करोड़पति बन गया था। उस अंगूठी से ढेर सारे पैसे मिलने के स्वप्न में पूरा परिवार दिन रात खोया रहता और उसका अच्छा दाम देने वाला ग्राहक ढूंढने के लिए खूब दूर दूर की यात्रा करने लगा, अब सब आशा से खुश थे मगर जीवन का जो आनंद, सुख और संतुष्टि उनमें पहले थी वह खत्म हो गई थी।
पूरा परिवार घूमने के लिए गोआ गया वहाँ समंदर में वे सब नहा रहे थे, मस्ती में डूबे थे। जब सब बाहर आए और होटल पहुँचे तब व्यापारी ने देखा कि अंगूठी उसके पास नहीं है। सारा मज़ा दुख में बदल गया, वे बदहवास होकर अंगूठी ढूंढने में लग गए पर अफसोस घंटो भूखे प्यासे बदहवास हालात में ढूंढने पर भी वो अंगूठी नहीं मिली। व्यापारी को सदमा लग गया और उसकी हृदय गति रुकने से वहीं मौत हो गई, परिवार अनाथ हो गया। परिवार के पास आय का साधन खत्म हो गया था और जो जमा पूँजी थी वो भी खत्म होने वाली थी।
आखिर में व्यापारी के परिवार की दुर्दशा हो गई थी।
यह काल्पनिक कहानी है जो हमें बहुत कुछ सिखाती है। जब हम अपनी भावनाओं को चीज़ों से, परिस्थितियों से, व्यक्तियों से जोड़कर रखते हैं तब हमारी भावनाएँ उनके अधीन रहती हैं व बदलती रहती हैं। हम भावनाओं के गुलाम बन जाते हैं जिसकी वजह से हम विभिन्न भावनाओं से क्षणिक सुख और दुख भोगते रहते हैं।
दूसरी बात ज़्यादा लालच में फँसकर अपने वर्तमान की अनदेखी करने से भविष्य बर्बाद हो सकता है। स्पप्न दुनिया के लालच में आकर अपनी नींव को कमज़ोर नहीं होने देना चाहिए।
महेश शर्मा लाइफ कोच और काउंसलर
मानस यंत्रा - साइकोलॉजी और कॉउंसलिंग सेंटर
इस कहानी को पढ़कर आप क्या समझते हैं, आपके मन में प्रश्न उठते हैं या आप कहानी पर अपना मत व आंकलन ज़रूर लिखें।
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