रक्षाबंधन सिर्फ प्रेम का बंधन
वैदिक धर्म अनुसार "रक्षासूत्र (रक्षाबंधन)" इस पवित्र भावना के साथ बाँधा जाता है कि बंधवाने वाले व्यक्ति की ईश्वर रक्षा करें, विजय, शक्ति आदि उसे प्रदान करें। रक्षाबंधन कोई भी व्यक्ति किसी भी व्यक्ति को बाँध सकता है। इसकी प्रथम शुरुवात देवराज इंद्र की पत्नी शचि ने तपस्या से प्राप्त "रक्षासूत्र" अपने पति इंद्र की असुरों के रक्षा करने के लिए उनकी कलाई में श्रावण मास की पूर्णिमा को बाँधा था। इसी प्रकार माता लक्ष्मी ने गरीब महिला का रूप धारण कर राजा बलि को श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन कलाई पर रक्षासूत्र बाँधा था। राजा बलि दानवीर थे तो उन्होंने रक्षासूत्र बांधने के उपलक्ष में गरीब महिला को कुछ माँगने को कहा और वचन दिया कि जो भी वह मांगेगी वह राजा बलि उन्हें देंगे तब माता लक्ष्मी ने राजा बलि के द्वारपाल बने अपने पति श्री विष्णु को माँगा। दानवीर राजा बलि तब पहचान गए कि यह गरीब महिला नहीं वरन स्वयं माता लक्ष्मी हैं। राजा बलि ने श्री विष्णु को उनके दिए वचन से मुक्त कर माता लक्ष्मी की इच्छा पूरी की तथा माता लक्ष्मी ने राजा बलि को भाई के रूप में स्वीकार किया। माता लक्ष्मी ...